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Showing posts from May, 2020

The Hindu Marriage Act, 1955 in English

  The Hindu Marriage Act, 1955 in English:- www.adhivaktalawcafe.com  हिंदू विवाह अधिनियम,  1955 पूरे भारत में लागू होता है और दिनांक 30 अक्टूबर 2019 से यह अधिनियम जम्मू और कश्मीर में भी लागू होने लगा है। इस अधिनियम मे कुल 30 धाराएं हैं जोकि मुख्य रूप से छः भागो मे बांटा गया है। (1) प्रारम्भिक (Preliminary) Section  (1-4) (2) हिन्दू विवाह  (Hindu Marriages ) Section  (5-8) हिंदू विवाह की शर्तें एवं हिंदू विवाह  का रजिस्ट्रीकरण आदि से संबंधित प्रावधान दिए गए। (3) दांपत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन और न्यायिक पृथक्करण (Restitution of Conjugal rights & Judicial Separation) Section (9-10) (4) विवाह की अकृतता और विवाह-विच्छेद  (Nulity of Marriage & Divorce  Section  (11-18) (5) अधिकारिता और प्रक्रिया (Jurisdiction & Procedure) Section (19-28) इस भाग में मुख्य रूप से यह बताया गया है कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 से संबंधित वाद किस न्यायालय के समक्ष दाखिल किए जा सकते हैं और उनकी प्रक्रिया क्या होगी।  (6) Savings & Repeals  Section  (29-30) वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 1

प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) है सबका अधिकार :-- शशिकांत भाटी एडवोकेट 30/05/2020

प्रथम सूचना रिपोर्ट ( First Information Report ) दर्ज करवाना हर पीड़ित का अधिकार है बल्कि पीड़ित ही नहीं एफ आई आर कोई भी व्यक्ति दर्ज करवा सकता है यह अधिकार हमें दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 154 द्वारा प्रदान किया गया है। कोई भी ऐसी घटना जिससे कि किसी संज्ञेय अपराध का घटित होना पाया जाता है । उस स्थिति में पीड़ित या पीड़ित का कोई संबंधी या अन्य कोई समाज का व्यक्ति भी पुलिस थाने के भार साधक अधिकारी ( SHO ) को लिखित रूप में या फिर यदि वह पढ़ा लिखा नहीं है, तो मौखिक रूप में भी सूचित कर सकता है। यदि किसी भी संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस थाने के भार साधक अधिकारी को मौखिक रूप में दी जाती है तब वह उसको लेख बंद्ध करेगा या फिर अपनेे अन्य किसी अधीनस्थ कर्मचारी को  लिखने निर्देश देेेेेेगा और ऐसी सूचना लिखने के बाद सूचना देनेे वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाई जाएगी । प्रत्येक ऐसी सूचना चाहेे वह लिखित रूप में दी जाए या मौखिक रूप में, उस पर सूचना देनेेेेे वाले व्यक्ति के  हस्ताक्षर अवश्य कराए जाएंगे और उसकी एक प्रतिलिपि निशुल्क प्रदान की जाएगी । एफ आई आर से संबंधित सभी फॉर्मेलिटीस पूरी हो जाने

Indian Evidence Act, 1872

INDIAN BARE ACTS Indian Evidence Act, 1872 PART I :   CHAPTER I :  PRELIMINARY 1. Short title, extent and commencement This Act may be called the Indian Evidence Act, 1872. 2 [It extends to the whole of India 3 [Except the State of Jammu and Kashmir] and applies to all judicial proceedings in or before any Court, including Courts-martial, 4 [other than Courts-martial convened under the Army Act.,] (44 & 45 Vict., c.58) 5[the Naval Discipline Act (29 & 30 Vict., c 109) or 6 [***] the Indian Navy (Discipline) Act. 19347] (34 of 1934) 8[or the Air Force Act] 7 Geo. 5, c. 51) but not to affidavits presented to any Court to any Court or Officer, not to proceedings before an arbitrator And it shall come into force on the first day of September, 1872. [2. Repeal of enactments: Repealed by the Repealing Act, 1938] 3. Interpretation clause In this Act the following words and expressions are use in the following sense. Unless a contrary intention appears from the context- “Court”- inclu

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