Skip to main content

Posts

Showing posts from July, 2020

Ansal brothers were sentenced to seven years imprisonment and fined Rs 2.5 crore each on the two for Tempering of evidence in Uphaar Cinema case

  [ Ansal brothers were sentenced to seven years imprisonment and fined Rs 2.5 crore each on the two for Tempering of evidence in Uphaar Cinema case.] मुख्य महानगर दंडाधिकारी (डॉ पंकज शर्मा) पटियाला हाउस कोर्ट ने उपहार सिनेमा मामले में सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप में अंसल बंधुओं को सात साल कैद और प्रत्येक पर 2.5 करोड़ रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई है। साल 1997 में आई बॉर्डर फिल्म दिल्ली स्थित उपहार सिनेमा में चल रही थी। फिल्म के दौरान लापरवाही बरतने के कारण आग लग गई थी,जिसमे दम घूटने और आग में झुलसने से 59 लोगो की जान चली गई थी। Law of Crimes - Multiple Choice Questions उक्त मामले में माननीय न्यायालय ने सह अभियुक्त गण पीपी बत्रा, दिनेश चंद्र शर्मा और अनूप सिंह करायत को भी दोषी ठहराया। उपहार सिनेमा आग की घटना से संबंधित सबूतो से छेडछाड के मामले में सजा की अवधि ( Quantum of punishment ) पर बहस के दौरान सभी दोषियों की ओर से सामान्य कारण प्रस्तुत किए गए। सभी दोषियों ने अपनी उम्र और खराब स्वास्थ्य के चलते कम से कम सजा सुनाए जाने की माननीय न्यायालय से अपील की। माननीय न्यायालय ने माना

My family also victim of Judicial delay. #Justice_R_Bhanumathi

Justice R.Banumathi  माननीय सुप्रीम कोर्ट की छठी महिला जज और सबसे बेहतरीन जजों में से एक जस्टिस आर भानुमति का सुप्रीम कोर्ट में आज आखिरी कार्य दिवस था । बार एसोसिएशन ऑफ़ सुप्रीम कोर्ट की तरफ से उनके लिए फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया गया था । जिसमें जस्टिस आर. भानुमति ने कहा कि उनका जन्म तमिल नाडु के एक छोटे से गांव में हुआ था। 2 साल की उम्र में ही एक बस एक्सीडेंट में मैंने अपने पिता को खो दिया था। उनकी माताजी ने एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में मुआवज़े के लिए केस फाइल किया था और कोर्ट ने डिक्री ( आदेश ) भी पारित कर दिया । लेकिन प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि हम मुआवजा प्राप्त ही नहीं कर पाए। इस तरह हमारा परिवार खुद देरी से मिले न्याय का शिकार हो चुका है। जस्टिस आर. भानुमति ने अपने कार्यकाल में कई यादगार निर्णय दिए हैं । उन्होंने हमेशा ही नए अधिवक्ताओं को कठिन मेहनत करने और पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया । उन्होंने अपनी फेयरवेल स्पीच में यह भी कहा कि अगर उन्होंने कभी किसी अधिवक्ता की भावनाओं को ठेस पहुंचाई हो तो उन्हें माफ करें । 1988 में 33 साल की उम्र में तमिलनाडु प्रदेश की हाय

Section 76 in The Code Of Criminal Procedure, 1973

Section 76 in The Code Of Criminal Procedure, 1973 76. Person arrested to be brought before Court without delay. The police officer or other person executing a warrant of arrest shall (subject to the provisions of section 71 as to security) without unnecessary delay bring the person arrested before the Court before which he is required by law to produce such person: Provided that such delay shall not, in any case, exceed twenty- four hours exclusive of the time necessary for the journey from the place of arrest to the Magistrate' s Court. Mohit Bhati Advocate  इसलिए जरूरी होता है पुलिस वेरीफिकेशन:- https://www.adhivaktalawcafe.com/2020/07/blog-post_7.html

Test your knowledge instantly! Let's get started, answer 2 simple questions