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वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत में गिने जाएंगे - छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

  वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत में गिने जाएंगे -  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत याचिका स्वीकृत की, कि अगर 60 दिन के अंदर कोई भी वैधानिक अवकाश  होता है तो वह भी दंड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 167(2) डिफॉल्ट जमानत में गिना जाएगा और मुकदमे निरुद्ध अभियुक्त की 60 दिन के अंदर चार्जशीट ना फाइल होने पर जमानत प्रदान की जाएगी।

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The Fundamental Rights Of An Individual Can Not Be Defeated Other Than In Accordance With Law: Karnataka High Court Grants Default Bail-In Case Of UAPA Bengaluru Riots Case

  The Fundamental Rights Of An Individual Can Not Be Defeated Other Than In Accordance With Law: Karnataka High Court Grants Default Bail-In Case Of UAPA Bengaluru Riots Case कर्नाटक हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2020 को थाना DJ Halli & KG Halli क्षेत्र, बेंगलुरु में हुए दंगों में आरोपित 115 अभियुक्तों को दंड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 167(2) का लाभ देते हुए जमानत के आदेश जारी कर दिए। Karnataka High Court                Brief Facts Of The Case: याचीगणों पर कथित रूप से आरोप है कि उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए फेसबुक पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। याचीगण एक विशेष संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं और एक एमएलए के परिचित भी हैं। अभियुक्त मुजम्मिल पाशा और उसके अन्य साथियों को दिनांक 12 नवंबर 2020 को अन्तर्गत धारा 15/16/18/20 प्रिवेंशन ऑफ अनलॉफुल एक्टिविटीज 1967 और 143/147/148/149/332/333/353/427/436 भारतीय दंड संहिता, 1860 और प्रीवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक  प्रॉपर्टी , 1984  की धारा 4 में मुकदमा पंजीकृत कर गिरफ्तार कर लिया गया था और उसी दिन मजिस्ट्रेट द्वारा उन्हें  पुलिस

Filing common chargesheet in multiple crimes is impermissible: Karnataka High Court

कई अपराधों में एक ही आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं है: कर्नाटक उच्च न्यायालय कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में कर्नाटक राज्य बनाम ग्रीनबड्स एग्रो फॉर्म लिमिटेड कंपनी के मामले में अवधारित किया कि कई अपराध और अलग-अलग शिकायतें होने पर एक सामान्य चार्जशीट दायर नहीं की जा सकती है। निचली अदालत ने आरोपपत्र को इस आधार पर खारिज कर दिया कि पुलिस निरीक्षक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए सक्षम अधिकारी नहीं है। सम्बन्धित न्यायालय ने जांच अधिकारी (आईओ) को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए आरोपी को भी आरोपमुक्त कर दिया। High Court of Karnataka उच्च न्यायालय के समक्ष, राज्य लोक अभियोजक (एसपीपी) ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने विशेष कानून ( Special Act ) के प्रावधानों की व्याख्या करने में गलती की और आरोपी को आरोपमुक्त करने का कार्य किया जोकि अवैध था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की परपोती को साउथ अफ्रीका में फ्रॉड करने के आरोप में 7 साल की सजा सुनाई गई है। एस.पी.पी ( Special Public Prosecutor ) ने आगे तर्क दिया कि विशेष कानून के तहत स्थापित विशेष न्यायालय सभी अपर

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