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वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत में गिने जाएंगे - छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

  वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत में गिने जाएंगे -  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत याचिका स्वीकृत की, कि अगर 60 दिन के अंदर कोई भी वैधानिक अवकाश  होता है तो वह भी दंड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 167(2) डिफॉल्ट जमानत में गिना जाएगा और मुकदमे निरुद्ध अभियुक्त की 60 दिन के अंदर चार्जशीट ना फाइल होने पर जमानत प्रदान की जाएगी।

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वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत में गिने जाएंगे - छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

  वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत में गिने जाएंगे -  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत याचिका स्वीकृत की, कि अगर 60 दिन के अंदर कोई भी वैधानिक अवकाश  होता है तो वह भी दंड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 167(2) डिफॉल्ट जमानत में गिना जाएगा और मुकदमे निरुद्ध अभियुक्त की 60 दिन के अंदर चार्जशीट ना फाइल होने पर जमानत प्रदान की जाएगी।

Beware of oxygen cylinder scam and protect yourself from cyber fraud in the time of Covid-19

Beware of oxygen cylinder scam and protect yourself from cyber fraud in the time of Covid-19 Regarding the prevention of cheating in the name of the coronavirus : At present, due to the outbreak of the corona epidemic,  frauds are being committed through social sites/apps in the name of Remdisivir injections, beds in hospitals, or in the same name of oxygen cylinders which are being done in the following ways : A - By putting a fake name of the hospital / medical etc. On Google and posing as an employee there on the phone, fraud is being done by taking advance payment. B - The details of the relatives of the patients,  which are being posted by them for seeking help, are misused by calling and cheating them on social media by making advance payment. C - Fraudsters create fake websites e-Commerce Platform, social media accounts, and E-mails claiming to sell and deliver medical products, victims are asked to pay via bank transfer / UPI. D - E-mail, links related to the epidemic,

जानिए चेक बाउंस केस की पूरी प्रक्रिया

  💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 By :- मोहित भाटी एडवोकेट 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

If an officer in charge of a police station refuse to register an FIR. What to do then?

अगर पुलिस एफ आई आर दर्ज करने से मना कर दे। तब क्या करें ?  Adhivakta Law Cafe किसी भी संज्ञेय मामले की सूचना पुलिस को प्राप्त होने पर चाहे वह किसी भी माध्यम से प्राप्त हुई हो । पुलिस का कर्तव्य बनता है कि वह उस मामले में CR.P.C की धारा 154 के अन्तर्गत तुरंत एफ आई आर दर्ज कर, विवेचना शुरू कर दे और पीड़ित पक्ष की न्याय दिलाने में हरसंभव मदद करें । ऐसे संज्ञेय अपराध, जिसमें एफ आई आर दर्ज की गई है, उससे संबंधित सभी सबूतों को इकट्ठा करें एवं अभियुक्त को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करें । लेकिन ज्यादातर मामलों में पुलिस ऐसा करती नहीं है और अपने कर्तव्यों को भूल जाती है । ऐसी स्थिति में पीड़ित पक्ष के पास भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता 1973 ( सीआरपीसी ) की धारा 156 ( 3 ) के तहत यह अधिकार है कि वह माननीय न्यायालय के समक्ष एफ आई आर दर्ज कराने हेतु अपना प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकता है । यदि माननीय न्यायालय को यह समाधान हो जाता है कि ऐसा कोई संज्ञेय अपराध घटित हुआ है । जिसमें प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर उचित कार्रवाई की जानी आवश्यक है । तो माननीय न्यायालय पुलिस थाने के भार स

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