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Showing posts with the label Legal news

वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत में गिने जाएंगे - छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

  वैधानिक अवधि में हुए अवकाश भी धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत में गिने जाएंगे -  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत याचिका स्वीकृत की, कि अगर 60 दिन के अंदर कोई भी वैधानिक अवकाश  होता है तो वह भी दंड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 167(2) डिफॉल्ट जमानत में गिना जाएगा और मुकदमे निरुद्ध अभियुक्त की 60 दिन के अंदर चार्जशीट ना फाइल होने पर जमानत प्रदान की जाएगी।

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Heinous crimes such as under 376 IPC, can not be compounded or proceedings, can not be quashed merely because the prosecutrix decides to marry the accused: Allahabad High Court

  Heinous crimes such as under 376 IPC, can not be compounded or proceedings, can not be quashed merely because the prosecutrix decides to marry the accused. माननीय  इलाहाबाद उच्च न्यायालय  ने एक माम ले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बलात्कार अन्तर्गत धारा 376 भारतीय दंड संहिता, 1860 जैसे जघन्य अपराधों मे केवल इस आधार पर समझौता स्वीकृत या कार्रवाई को समाप्त नहीं किया जा सकता क्योंकि पीड़िता अभियुक्त से शादी करने के लिए तैयार है। Allahabad High Court जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल बेंच उक्त जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आवेदक कामिल द्वारा अपने अधिवक्ता श्री शकील अहमद आज़मी के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष यह जमानत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 439 दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत दाखिल किया गया था। यहां पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सत्र न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के समक्ष जमानत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 439 दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत प्रेषित किये जाने का प्रावधान है। आवेदक अभियुक्त कामिल का जमानत प्रार्थना पत्र विशेष न्यायालय, पोक्सो एक्ट, इल

The Fundamental Rights Of An Individual Can Not Be Defeated Other Than In Accordance With Law: Karnataka High Court Grants Default Bail-In Case Of UAPA Bengaluru Riots Case

  The Fundamental Rights Of An Individual Can Not Be Defeated Other Than In Accordance With Law: Karnataka High Court Grants Default Bail-In Case Of UAPA Bengaluru Riots Case कर्नाटक हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2020 को थाना DJ Halli & KG Halli क्षेत्र, बेंगलुरु में हुए दंगों में आरोपित 115 अभियुक्तों को दंड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 167(2) का लाभ देते हुए जमानत के आदेश जारी कर दिए। Karnataka High Court                Brief Facts Of The Case: याचीगणों पर कथित रूप से आरोप है कि उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए फेसबुक पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। याचीगण एक विशेष संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं और एक एमएलए के परिचित भी हैं। अभियुक्त मुजम्मिल पाशा और उसके अन्य साथियों को दिनांक 12 नवंबर 2020 को अन्तर्गत धारा 15/16/18/20 प्रिवेंशन ऑफ अनलॉफुल एक्टिविटीज 1967 और 143/147/148/149/332/333/353/427/436 भारतीय दंड संहिता, 1860 और प्रीवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक  प्रॉपर्टी , 1984  की धारा 4 में मुकदमा पंजीकृत कर गिरफ्तार कर लिया गया था और उसी दिन मजिस्ट्रेट द्वारा उन्हें  पुलिस

Heinous and serious offences such as murder, rape and dacoity cannot be quashed on the ground of Settlement

THE  HIGH  COURT  OF  JUDICATURE  AT  BOMBAY CRIMINAL  APPELLATE  JURISDICTION CRIMINAL  WRIT  PETITION  NO.  4330  OF  2019

Filing common chargesheet in multiple crimes is impermissible: Karnataka High Court

कई अपराधों में एक ही आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं है: कर्नाटक उच्च न्यायालय कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में कर्नाटक राज्य बनाम ग्रीनबड्स एग्रो फॉर्म लिमिटेड कंपनी के मामले में अवधारित किया कि कई अपराध और अलग-अलग शिकायतें होने पर एक सामान्य चार्जशीट दायर नहीं की जा सकती है। निचली अदालत ने आरोपपत्र को इस आधार पर खारिज कर दिया कि पुलिस निरीक्षक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए सक्षम अधिकारी नहीं है। सम्बन्धित न्यायालय ने जांच अधिकारी (आईओ) को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए आरोपी को भी आरोपमुक्त कर दिया। High Court of Karnataka उच्च न्यायालय के समक्ष, राज्य लोक अभियोजक (एसपीपी) ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने विशेष कानून ( Special Act ) के प्रावधानों की व्याख्या करने में गलती की और आरोपी को आरोपमुक्त करने का कार्य किया जोकि अवैध था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की परपोती को साउथ अफ्रीका में फ्रॉड करने के आरोप में 7 साल की सजा सुनाई गई है। एस.पी.पी ( Special Public Prosecutor ) ने आगे तर्क दिया कि विशेष कानून के तहत स्थापित विशेष न्यायालय सभी अपर

प्रचार के लिए था सूट: दिल्ली हाईकोर्ट ने 5जी रोलआउट के खिलाफ जूही चावला की याचिका खारिज की, 20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया

  माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली , नई दिल्ली   आदेश दिनांक :- 04/06/2021   जूही चावला आदि             ..... वादीगण             द्वारा अधिवक्ता : मिस्टर दीपक खोसला                             बनाम        साइंस एंड   इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड आदि।                                          .... प्रतिवादी द्वारा अधिवक्ता : मिस्टर तुषार मेहता ( सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ) आदि। प्रचार के लिए था सूट: दिल्ली हाईकोर्ट ने 5जी रोलआउट के खिलाफ जूही चावला की याचिका खारिज की, 20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला  और दो अन्य लोगो ने दिल्ली उच्च न्यायालय  के समक्ष एक मुकदमा दायर किया था, जिसमें तर्क दिया गया था कि जब तक 5G तकनीक " सुरक्षित प्रमाणित " नहीं हो जाती, तब तक इसके रोल आउट की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारत में 5जी तकनीक ( जूही चावला और अन्य बनाम विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड और अन्य ) के रोलआउट के खिलाफ बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला द्वारा दायर याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक आरोपी का कथित तौर पर पक्ष लेने और उसके वाहन का इस्तेमाल करने के आरोप में निलंबित न्यायिक अघिकारी को किया बहाल।

  उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक आरोपी का कथित तौर पर पक्ष लेने और उसके वाहन का इस्तेमाल करने के आरोप में निलंबित न्यायिक अधिकारी को किया बहाल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने तत्कालीन सिविल जज (सीनियर डिविजन) , जिला अल्मोड़ा, अभिषेक कुमार श्रीवास्तव , को बहाल कर दिया है, जिनको अभियुक्त चंद्रमोहन शैठी के वाहन का इस्तेमाल के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया था। Google search  उत्तराखंड हाई कोर्ट ने दिनांक 22 फरवरी 2021 सिविल जज (सीनियर डिविजन) अभिषेक कुमार श्रीवास्तव को सस्पेंड करते हुए डिस्ट्रिक्ट जजशिप हेड क्वार्टर देहरादून से अटैच कर दिया था। अब उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा उक्त मामले में उन्हें बहाल करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ( चतुर्थ) के रूप मे देहरादून में नियुक्त कर दिया गया है। दिनांक 28 मई 2021 को उत्तराखंड हाई कोर्ट ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि " श्री अभिषेक कुमार श्रीवास्तव तब के सिविल जज  (सीनियर डिविजन), अल्मोड़ा जिन्हें  कार्यालय ज्ञापन संख्या ( Vide Office-Memorandum No)  10/03-I/UHC/Vig./2021  दिनांक :- 22.02.2021 के तहत निलंबित कर दिया गया था, अब उन्हें

हाई कोर्ट अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र (Anticipatory Bail) खारिज करने के बावजूद भी दुर्लभ परिस्थितियों में अभियुक्त को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान कर सकते है : सुप्रीम कोर्ट

  In The Supreme Court Of India CRIMINAL  APPELLATE  JURISDICTION CRIMINAL  APPEAL  No.522  OF  2021 [Arising  out  of  Special  Leave  Petition  (Crl.)  No.  2096  of  2021]                   Nathu Singh        ..... Appellant (अपीलकर्ता) VS. State of Uttar  Pradesh  & Ors.                      .....Respondents And CRIMINAL  APPEAL  No.523  OF  2021 [Arising  out  of  Special  Leave  Petition  (Crl.)  No.  2271  of  2021] Ompal Singh         ..... Appellant (अपीलकर्ता) VS. State of Uttar  Pradesh  & Ors. कोरम सीजीआई एन.वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस।

Some General Definitions in Law of Crimes

  Law provides for definitions of certain words that are used repeatedly in the Penal Code. The purpose is to give them a definite meaning and avoid repetition. We shall have a look at some of the most important terms of the Indian Penal Code. Wrongful gain. Gain of property By unlawful means To which the person gaining is not legally entitled. Wrongful loss. Loss of property By unlawful means To which the person losing it is legally entitled. Gaining wrongfully. A person is said to gain wrongfully when such person retains wrongfully, as well as when such person acquires wrongfully. Losing wrongfully. A person is said to lose wrongfully when such person is wrongfully kept out of any property, as well as when such person is wrongfully deprived of property. Dishonestly. Whoever does anything with the intention of causing wrongful gain to one person or wrongful loss to another person , is said to do t

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